अकाल मरण का रहस्य

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क्या है अकाल मरण ?

कोई भी जीव जो करोड़ों वर्षो तक जीने की योग्यता रखता है वो भी एक अन्तर्मुहूर्त में मरण को प्राप्त हो सकता है। परंतु जब कोई जीव जहर खाकर, ऊंची इमारत से कूदकर, दुर्घटना से या अन्य किसी भी कारण से असमय मरण को प्राप्त हो जाता है तो उसे अकाल मरण कहते हैं। यानि कहने का तात्पर्य यह है कि जब कोई भी जीव अपनी आयु पूर्ण किये बिना ही असमय मर जाये तो उसे ही अकाल मरण कहते हैं।

कैसे होता है अकाल मरण

इसे बहुत ही सरल उदाहरण द्वारा समझते हैं कि अकाल मरण होता कैसे है:
मान लीजिए कोई गैस का सिलेंडर 20 दिन चलता है लेकिन अगर वह लगातार लीक होता रहे तो वह 20 दिन से पहले ही खत्म हो जायेगा और वह फट भी सकता है, बिल्कुल ऐसे ही अकाल मरण में भी होता है यानी समय से पूर्व मृत्यु को प्राप्त होना। अकाल मृत्यु को कदली घात भी कहते हैं क्योंकि जैसे केले का पेड़ जब एक बार फल दे देता है तो उसके बिल्कुल बराबर में एक नया पेड़ उग जाता है। उस नये पेड़ को अच्छे से खाद्य,पानी, हवा आदि मिले इसके लिए किसान पुराने हरे भरे पेड़ को ऊपर से काट देता है और ऐसे वह पेड़ अपनी आयु पूर्ण किये बिना ही मरण को प्राप्त हो जाता है यानि अकाल मरण।

क्या होता है अकाल मरण के बाद

अकाल मरण को लेकर काफी अलग अलग मत हैं। वैदिक धर्म के अनुसार अकाल मृत्यु के बाद जीव प्रेत योनि में चला जाता है और वह अपनी बची हुई आयु प्रेत बनकर पूर्ण करता है। वहीं जैन धर्मानुसार जीव नई योनि मे जाता है क्योंकि मरण सिर्फ व्यवहार से होता है निश्चय से नहीं,और कोई भी जब तक मरण को नहीं प्राप्त हो सकता है जब तक उसके आयु के सारे परमाणु क्षय न हो जायें।

Edited by: Neelima Sandeep Agarwal, Lucknow