वैलेंटाइन डे का सच

261 261 admin

वैलेंटाइन डे क्या ?

तीसरी सदी में रोम के राजा का मानना था की शादी करने से पुरषों की शक्ति और बुद्धि खत्म हो जाती है , इसलिए उसने अपने राज में विवाह पर प्रतिबंध लगवा दिया था इसी बात का विरोध वहीं के संत वेलेंटाइन ने किया और अनेक लोगो को शादी के लिए प्रेरित किया जिसके बाद राजा ने 14 फरबरी को उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया तभी से वैलेंटाइन डे की शुरुवात हुई. लोगों ने उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया और ये परम्परा आज तक चली आ रही है

वैलेंटाइन डे का भारतीय संस्कृति पर दुष्परिणाम 

भारतीय युवाओं द्वारा भी इन्ही चीजों को अपनाया जा रहा है जो की अशोभनीय है, जिस तरह पश्चिमी संस्कृति अपनाते हुए आज के युवाओं द्वारा वैलेंटाइन डे मनाया जा रहा है यह एक मुर्खता भरा कृत्य है| हमें वैलेंटाइन डे को एक आदर्श के रूप में स्वीकार करनाचाहिए, जिन्होंने विवाह जैसी परंपरा बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी | ऐसा करके उन्होंने पूरी मानव जाति के लिए एक आदर्श खड़ा किया| इसको हमे एक आदर्श के रूप में गिनना चाहिए लेकिन आज वैलेंटाइन डे को एक दसरों के प्रति प्यार और इजहार का प्रतीक बना दिया गया, जो की बहुत ही सोचनीय विषय है | वैलेंटाइन डे का आदर्श तो यह कहता है की पहले विवाह करो फिर प्यार करो पर आज के युवाओं का आदर्शपहले प्यार करो विवाह करने का पता नहीं “ये क्या परिणाम” !!

युवाओं के पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ते हुए कदम को कैसे रोकें 

आज का हर युवा पश्चिमी संस्कृति को अपनाकर भारतीय संस्कृति को भूलता जा रहा है| जो हमारी परम्पराओं के विरुद्ध है पश्चिमी चकाचौंध के कारण हमे लगता है की पश्चिम की हर चीज, हर बात अच्छी एवं अनुकरणीय है हम बिना यह सोचे की वह चीज हमारे लिए उपयोगी है या नहीं उसे अपनाने के लिए लालायित रहते है | वास्तव में हमे “WEST का BEST लेना चाहिए न की WEST का WASTE”. पश्चिमी संस्कृति में सम्बन्ध केवल एक दिन के लिए होता है परन्तु भारतीय संस्कृति में सम्बन्ध जीवन भर के लिए होता है हमे एक दिन का नहीं जीवन भर का सम्बन्ध बनाना चाहिए |
आज के युवाओं को यह संकल्प लेना चाहिए की विवाह के पूर्व और विवाहेतर अनैतिक संबंधों का त्याग करेंगे और पूरी ईमानदारी के साथ दांपत्य जीवन जियेंगे, अपनी मर्यादाओं को खंडित नहीं होने देंगे और जीवन की पवित्रता को बनाए रखेंगे | यही सच्चा“वैलेंटाइन डे” साबित होगा |