दहेज का बदलता रूप और बचने के उपाय
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दहेज का बदलता रूप और बचने के उपाय दहेज अर्थात शादी में लड़की के पिता द्वारा लड़के को एक साथ कोई रकम या घर के सामान देना। आज इसने एक नए आग्रह का रूप ले लिया है जिसमें कि कईं बार आदमी को अपने सामर्थ्य से ऊपर जाकर यह कार्य करना पड़ता है। हमें ये…

पढाई में एकाग्रता
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एकाग्रता क्या है? एकाग्रता से अभिप्राय है कि आप अपने दिमाग को गलत और अनचाहे विचारों से बचायें रखना, साथ ही अपना सारा ध्यान एक जगह पर लगाए रखना । वैसे तो जीवन के हर हिस्से में एकाग्रता की जरूरत होती है, परन्तु पढाई करने वाले बच्चों के लिए एकाग्र होना बहुत ही जरुरी है…

धर्म और विज्ञान
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क्या धर्म विज्ञान से पीछे रह गया है? धर्म और विज्ञान, दोनों एक दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं| दोनों की दिशाओं में विभिन्नता है| विज्ञान की निष्पत्तियाँ प्रयोग आधारित है वहीं धर्म अनुभव के आधार पर अपनी निष्पत्तियाँ बनाता है| प्रयोग आधारित निष्पत्तियाँ समय काल के अनुरूप बदलती रहती हैं| जैसे हम एटॉमिक सिस्टम…

संगति का जीवन पर प्रभाव
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स्वभाव पर किसका प्रभाव? विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों की दृष्टि से व्यक्ति के स्वभाव पर मुख्य रूप से दो बातों का प्रभाव होता हैं- (1) आनुवांशिकता (heredity) (2) संगति (Companionship) आनुवांशिक गुणों के अनुरूप ही व्यक्ति भीतर दोष/गुण आते हैं, जो आगे चलकर हमारा स्वभाव बन जाते हैं। लेकिन व्यक्ति के स्वभाव पर सबसे ज्यादा…

क्षमावाणी पर्व
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क्षमावाणी पर्व क्या है? * यह दिन अपने मन में बंधी क्रोध, अहंकार, राग व द्वेष की गाठों को खोलकर जीवन को उत्साह से सुख पूर्वक जीने का एक महान दिन है। * हम गुस्सा हो जाते हैं, बुरा महसूस करते हैं जब कोई हमारी बात नहीं मानता, हमारे अनुसार काम नहीं करता, झूठ बोलता…

उत्तम ब्रह्मचर्य(Supreme Celibacy)
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ब्रह्मचर्य के अर्थ : *ब्रह्म का अर्थ होता है -आत्मा। आत्मा की उपलब्धि के लिए किया जाने वाला आचरण ब्रह्मचर्य कहलाता है। मतलब, जो अपनी आत्मा के जितना नजदीक है वह उतना बड़ा ‘ब्रह्मचारी’ है और जो आत्मा से जितना अधिक दूर है वह उतना बड़ा ‘भ्रमचारी’ है। *ब्रह्मचर्य एक बहुत बड़ी साधना है क्योंकि…

उत्तम आकिंचन्य धर्म (Supreme Non-Attachment)
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आकिंचन्य आकिंचन्य मतलब खाली हो जाना।खाली होने से अभिप्राय है कि अंदर बाहर सब तरफ से त्याग करना। अगर त्याग कर दिया और मन से ‘अपना अपना’ नहीं गया तो सब बेकार है। मैंने इतना दान दिया, मैंने इतनी सारी सम्पति त्याग दी, ये मेरा सम्बन्धी था। ये मैंने और मेरे का अंतर्मन से त्याग…

उत्तम त्याग धर्म (Supreme Renunciation)
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*जोड़ना संग्रह है और जोड़कर उससे चिपक जाना परिग्रह है। *धन का संग्रह करना भी समाज के कल्याण के लिए बाँध का निर्माण करने के समान है। इसलिए धन का संग्रह करो, पर बाँध की भाँति करो। *जहाँ केवल संग्रह है वहाँ खारापन है और जहाँ वितरण है वहाँ मिठास है। *भाग्यलक्ष्मी के साथ पुण्यलक्ष्मी…

उत्तम तप(Supreme Austerity)
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उत्तम तप क्या है? *आसक्ति से विरक्ति, अशांति से शांति की ओर प्रस्थान का नाम ही उत्तम तप है। *तपस्या उसे कहते हैं जिससे कर्म की निर्जरा हो। इसलिए तपस्या को कर्म की निर्जरा का साधन कहा गया है। उत्तम तप के प्रकार- 1. शारीरिक तप: व्रत करना, त्याग करना, उपवास करना तपस्या करना आदि…

उत्तम संयम धर्म(Supreme Restraint)
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खुद को गलत कार्यों से बचाते हुए अच्छे कार्यों की तरफ ले जाना ही उत्तम संयम है। हम संयम क्यों करें? मानसिक संयम- आवश्यकता से अधिक देखना, सुनना, व्यस्तता हमारे मन की शांति का भंग होना। शारीरिक बल- हर समय AC का प्रयोग या स्वादिष्ट भोजन अधिक खाने पर हमारे स्वास्थ्य का खराब होना। स्वास्थ्य…

उत्तम शौच धर्म(Supreme Purity)
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उत्तम शौच से अभिप्राय :- उत्तम शौच का अर्थ है पवित्रता। आचरण में नम्रता, विचारों में निर्मलता लाना ही शौच धर्म है। बाहर की पवित्रता का ध्यान तो हर कोई रखता है लेकिन यहां आंतरिक पवित्रता की बात है। आंतरिक पवित्रता तभी घटित होती है जब मनुष्य लोभ से मुक्त होता है। उत्तम शौच धर्म…

उत्तम सत्य धर्म (Supreme Truth)
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उत्तम सत्य धर्म 1.यह रूप भी असत्य, यहरंग भी असत्य, यह भोग भी असत्य, यह विलासता के साधन भी असत्य हैं। कुछ भी सत्य नहीं, सब छूटने वाले हैं। 2.यदि सत्य कुछ है तो हमारे भीतर का परम तत्व है बाकि सब असत्य है। 3.सत्य को पहचानो, सत्य पर निष्ठा रखो, सत्य आचरण करो और…