उत्तम आर्जव धर्म (Supreme Straightforwardness)
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उत्तम आर्जव धर्म – वक्रता, कुटिलता, मायाचारी हमारे जीवन का टेढ़ापन है। -जीवन को सीधा वही कर पाते हैं जो साधना के प्रहार को झेलने के लिए तत्पर रहते हैं। – कृत्रिमता, कुटिलता, जटिलता और कपट का अभाव ही उत्तम आर्जव धर्म का प्रारम्भ है। – कृत्रिमता को जितना ओढोगे जीवन की सहजता नष्ट होगी,…

अहं से ही अहंकार
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अहंकार – झुकोगे तो मजबूत बनोगे, अकड़ोगे तो टूट जाओगे। – अहं क्या है? अपने आपको सच्चा और अपने आपको अच्छा मानने की वृत्ति। अपने ही विषय में सोचने की वृत्ति । अपने आपको ही प्रदर्शित करने की वृत्ति। – जिसमे जितना अहं होता है, वह उतना अहंकारी होता है और उतना ही मान चाहता…

उत्तम मार्दव धर्म (Supreme Modesty)
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क्या होता है मार्दव धर्म? कोमलता के भाव ही मार्दव है। चित्त की सरलता, विनय करना, आदर करना, बहुमान करने के भाव ही मार्दव धर्म है। उत्तम मार्दव धर्म अपनाने से मान व अहंकार का मर्दन होता है और व्यक्ति अपनी सच्ची विनयशीलता को प्रकट करता है। जब तक हम स्वयं के बारे में सोचते…

क्रोध- क्षमा का शत्रु
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क्रोध: -सहन करने में समाधान है, जवाब देने में संघर्ष। -एक गुणवान मनुष्य जिसे बिना कारण ही क्रोध उत्पन्न हुआ करता है उसका कोई भी सम्मान नहीं करता है। -क्रोध ! व्रत, तप, नियम और उपवास के द्वारा संचित किये हुए पुण्य को इस प्रकार से क्षणभर में नष्ट कर देता है जिस प्रकार से…

उत्तम क्षमा धर्म (Supreme Forgiveness)
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क्षमा: किसी ने आपके प्रति कोई दुर्व्यवहार किया, दुर्वचन कहा और कोई गलत कार्य किया। सामर्थ्य होने पर भी उसके अपकार को समता भाव से सह लेना, प्रतिकार नहीं करना ये क्षमा है। चार बातों से हमेशा दूर रहना चाहिए: क्रोध – आकुलता कलह – अनायास लड़ाई-झगड़ा क्रूरता – हिंसक प्रतिशोध और प्रतिरोध की भावना…

दशलक्षण पर्व
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क्या है दशलक्षण पर्व? दशलक्षण पर्व जैनों का सबसे महत्वपूर्ण एवं महान पर्व है। दशलक्षण पर्व हम लोक युगारंभ के उद्देश्य से मनाते हैं। जब पंचमकाल के बाद इस सृष्टि का प्रलय काल आएगा, सृष्टि विनष्ट होगी उसके बाद सुकाल के समय में 7 -7 दिन की 7 सुवृष्टियाँ होती हैं यानी 49 दिन होते…

क्या धर्म विज्ञान से पीछे रह गया है?
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क्या धर्म विज्ञान से पीछे रह गया है? धर्म और विज्ञान, दोनों एक दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं| दोनों की दिशाओं में विभिन्नता है| विज्ञान की निष्पत्तियाँ प्रयोग आधारित है वहीं धर्म अनुभव के आधार पर अपनी निष्पत्तियाँ बनाता है| प्रयोग आधारित निष्पत्तियाँ समय काल के अनुरूप बदलती रहती हैं| जैसे हम एटॉमिक सिस्टम…

आने वाली परीक्षाओं को कैसे सफल बनायें ?
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परिक्षाओं का दौर शुरू होने वाला हैं। यह समय माता पिता व बच्चों दोनो के लिए बेहद महत्वपूर्ण व जटिल होता हैं। परिक्षाओं के समय माता-पिता का कर्तव्य? माँ-बाप बच्चों पर प्रेशर न डालें। आज कल अच्छे अंक और अच्छे रेंक लाने का ट्रेंड हो गया है, जिसके  कारण माँ – बाप बच्चों पर अत्याधिक प्रेशर…

ऋषभदेव और शिव कौन थे
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(1) ऋषभदेव और शिव कौन थे : *ऋषभदेव:- जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे जिनके माता पिता जैन धर्म के अंतिम कुलकर राजा नाभिराय थे | भगवान ऋषभदेव का विवाह यशावती देवी और सुनंदा से हुआ| ऋषभदेव के 100 पुत्र और 2 पुत्रियाँ थी | उनमे भरत चक्रवर्ती सबसे बड़े थे एवं प्रथम चक्रवर्ती सम्राट…

ऋषभदेव और शिव में समानताएं
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आधार ऋषभदेव शिव योगी ऋषभदेव भगवान एक योगी है शिव का भी जो प्राचीन रूप है वो योगी के रूप में है। चिन्ह वृषभदेव का चिन्ह बैल है शिव का चिन्ह(वाहन) नंदी बैल है। रत्नत्रय ऋषभदेव रत्नत्रय के धारी थे शिव के साथ प्रतीक स्वरूप त्रिशूल है। केवलज्ञानी ऋषभदेव केवलज्ञानी थे शिव की तीसरी आंख…

स्मरण शक्ति कैसें बढ़ाऐं ?
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स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए चार मूल मंत्र हैं। यदि आप इन्हें करेंगे तो निश्चित ही आप सब याद रख पाएंगे। 1. सुबह सवेर जल्दी उठें और ओमकार के नाम की गहरी साँस भरकर नौ बार नाद करें। 2. थोड़ा सा भ्रामरी प्राणायम नियमित करें। 3. ऊँ ह्रीं णमो उवज्झायाणं की नीले रंग के ध्यान…

स्त्रियों का पुनर्विवाह एक अभिशाप
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स्त्रियों के लिए पुनर्विवाह का निषेध क्यों? दिगम्बर जैन मतानुसार स्त्री जिस पुरुष के साथ एक बार विवाह के बंधन में बंध जाती है, उसी पुरुष को अपना सर्वस्व देती है और उसी पुरुष के लिए पूर्ण समर्पित होती है| विषम परिस्थिति आने पर भी स्त्रियाँ पुनर्विवाह के लिए अग्रसर नहीं होती हैं और कर्म…