भावना योग
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भावना योग का महत्व जैन साधना में जो ध्यान है वह चित्त की एकाग्रता का नाम है और वहां तो यह कहा गया कि यदि तुम ध्यान की गहराई में डूबना चाहते हो तो ‘तुम कोई भी चेष्टा मत करो, कुछ बोलो मत, कुछ सोचो मत, आत्मा को आत्मा में स्थित रखो; यही परम ध्यान…

Urja Pravah Dhyaan
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ध्यान का सर्वप्रथम ध्येय, समर्पण। अपने शरीर के सभी अंगो को ढीला व शांत करें। अपने शरीर को अपने मानसिक निर्देश से शिथिल करें व अपने गुरु व प्रभु का स्मरण करें, धन्यवाद दें। अपने श्वांस और नि:श्वांस में संतुलन बनाएं व बीजाक्षर ॐ के उच्चारण से अपने शरीर, नस, नाड़ियों को ऊर्जावान करें। जल्दी…

Panch Parmeshthi Dhyan
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आज हम पांच परमेष्ठी का ध्यान करने जा रहे हैं। अपने पूरे शरीर को ढीला कर दीजिए। समर्पण के भाव से भर जाएं। पांच परमेष्ठी के पांच रंगों का स्मरण करें। अरिहंत परमेष्ठी का सफेद जो सात्विकता और शक्ति के प्रतीक होता है। सिद्ध परमेष्ठी का लाल, उर्जा स्फूर्ति का प्रतीक। आचार्य परमेष्ठी का पीला…

Pindasth Dhyaan
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सजग हो जाएं। ये शरीर नश्वर है। इसका मिटना तय है। एक दिन ये शरीर हमारे कर्मो के साथ राख में मिल जाएगा और बचेगा तो कर्म और शरीर से रहित शुद्ध-बुद्ध अविनाशी तत्व। यही तत्व ज्ञाता और दृष्टा है। हमें इसी तत्व का ध्यान करना है। अपने नाभि पर ध्यान लगाएं। महसूस करें, नाभि…