उत्तम आर्जव धर्म (Supreme Straightforwardness)

261 261 admin

उत्तम आर्जव धर्म

– वक्रता, कुटिलता, मायाचारी हमारे जीवन का टेढ़ापन है।

-जीवन को सीधा वही कर पाते हैं जो साधना के प्रहार को झेलने के लिए तत्पर रहते हैं।

– कृत्रिमता, कुटिलता, जटिलता और कपट का अभाव ही उत्तम आर्जव धर्म का प्रारम्भ है।

– कृत्रिमता को जितना ओढोगे जीवन की सहजता नष्ट होगी, सरलता नष्ट होगी, सत्य खत्म होगा और शांति विनष्ट होगी।

– मायाचारी का धन बिजली के समान क्षणिक है।

– आर्जव धर्म के लिए जीवन को कृत्रिमता से, कुटिलता से, जटिलता से बचाएँ और जीवन में कपट कभी न पनपने दें।

– मन, वचन, काय पूर्वक कुटिलता का त्याग करना ही आर्जव धर्म है।

Compiled by: Vidhu Jain, Noida

Leave a Reply