संयम, साधना और तप का अनमोल बंधन
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संयम, साधना और तप का अनमोल बंधन Invaluable bond of restraint, practice and tenacity संयम, साधना और तप इन तीनो का एक अनमोल बंधन ये एक दुसरे से भिन्य होते हुए भी एक दुसरे के जैसे हैं – मुनि श्री प्रमाण सागर जी बता रहे हैं संयम, साधना और तप के अनमोल बंधन के बारे…

वर्गणाएँ क्या होती हैं? पुण्य और पाप वर्गणाएँ कैसे पहचानें?
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वर्गणाएँ क्या होती हैं? पुण्य और पाप वर्गणाएँ कैसे पहचानें? Vargana Share

कषाय कम करने के उपाय
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कषाय कम करने के उपाय Ways to reduce Kashaya जीव संसार चक्र में अनादि काल से मुख्यत:चार कषायों क्रोध,मान,माया एवं लोभ के कारण भ्रमण करता आ रहा है! और इन्ही के कारण वह अनेक दुःख भोगता है और दुखी रहता है – मुनि श्री प्रमाण सागर जी बता रहे हैं कषाय कम करने के उपाय…

सामायिक और प्रतिक्रमण का महत्व
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सामायिक और प्रतिक्रमण का महत्व Samayik and Pratikraman सुख-दु:ख, लाभ-अलाभ, इष्ट-अनिष्ट आदि विषमताओं में राग-द्वेष न करना बल्कि साक्षी भाव से उनका ज्ञाता दृष्टा बने हुए समतास्वभावी आत्मा में स्थित रहना, अथवा सर्व सावद्य योग से निवृत्ति सो सामायिक है। पूर्वकृत दोषों का मन, वचन, काय से कृत कारित, अनुमोदना से विमोचन करना पश्चाताप करना,…

जैन मुनि नग्न क्यों रहते है?
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जैन मुनि नग्न क्यों रहते है? Why Jain monks are naked? “Digambar Jain saints do not put any cloth to cover their body. They consider directions or sky as their cloth and remain without clothes. Some people think that their nudity is indecency but nudity is a natural state of human beings. Clothes are the…

जैन आलू क्यों नही खाते
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जैन आलू क्यों नही खाते Why don’t eat potato? “Why below ground grown vegetable roots like Yam, potato should not be consumed? Is it a sin or violence involved in it? Elaborating muni shri Praman sagar ji along with health risks involved in consumption of roots. “ Share

ब्रह्मचर्य और उपवास का अर्थ
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ब्रह्मचर्य और उपवास का अर्थ Meaning of Brahmcharya and Upwaas “आत्मो उपलब्धि के लिए किया जाने वाला आचरण ब्रह्मचर्य , जाने गुरुदेव मुनि श्री प्रमाण सागर जी द्वारा उपवास और ब्रह्मचर्य का अर्थ “ Share

दान में बोली हुई राशी को विलम्ब से देना उचित?
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दान में बोली हुई राशी को विलम्ब से देना उचित? Delay in giving the commited amount for donation. “दान देने की भावना हम सभी के अंदर होती है पर हम लोग दान की राशी बोलकर उसको विलम्ब से देते है क्या ऐसा करना उचित है , इसके क्या परिणाम हो सकते है – सुनिए मुनि…

अष्टान्हिका पर्व क्या और कैसे मनाये?
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अष्टान्हिका पर्व क्या और कैसे मनाये? Celebrating Ashtanika Parv “संपूर्ण श्रेष्ठ पर्वों में अष्टान्हिका पर्व का अपना विशेष महत्व है। कार्तिक, फाल्गुन व आषाढ़ के अंतिम आठ दिनों में यह पर्व आता है।अष्टमी से प्रारंभ होकर चतुर्दशी व पूर्णिमा तक आठ दिनों में पूरा होता है। इस पर्व में किए गए जप, तप, अनुष्ठान विशेष…

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