उत्तम क्षमा
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उत्तम क्षमा आज बात ‘क्षमा’ की है और धर्म की है, जब मैं सोचता हूं तो मुझे लगता है कि धर्म की शुरुआत ही तब होती है, जब हमारे भीतर…

उत्तम मार्दव
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उत्तम मार्दव एक बार कुऍं ने सागर से शिकायत भरे स्वरों में कहा कि तुम्हारा कैसा पक्षपातपूर्ण रवैया है, सारी नदियों, नालो को अपने में समाहित कर लेते हो पर…

उत्तम आर्जव
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उत्तम आर्जव एक राजा के पास एक व्यापारी विशेष प्रकार का दर्पण लेकर के पहुंचा। दर्पण देखने में सामान्य था लेकिन उसका मूल्य बहुत था। राजा ने मूल्य जान कर…

 उत्तम सत्य
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 उत्तम सत्य एक राजा रात सपने में देखा कि अचानक अपरिचक्र का आक्रमण हो गया है। अपरिचक्र के इस अप्रत्याशित आक्रमण से वह अपने आप को बचा नहीं सका। उसे…

उत्तम शौच
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उत्तम शौच एक जिज्ञासु भक्त, भगवान के चरणों में प्रार्थना कर रहा था। उसकी पुकार सुनकर आकाश से वाणी गुंजी। वत्स! तुम क्या चाहते हो, तुम क्या चाहते हो? जैसे…

 उत्तम संयम
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 उत्तम संयम आज बात ‘संयम’ की है, जब कभी भी संयम की बात आती है, संयमी व्यक्ति की बात आती है, हमारे सामने एक ऐसे व्यक्ति की छवि झूलने लगती…

उत्तम तप
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उत्तम तप पानी मिट्टी को गला देता है, बहा देता है लेकिन वही मिट्टी जब मंगल कलश के रूप में परिवर्तित हो जाती है, आंच में पककर के घड़े का…

उत्तम त्याग
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उत्तम त्याग आज बात ‘त्याग’ की है और त्याग के दो रूप है एक सर्वस्व और दूसरा अंश। जो सर्वस्व को त्यागता है, वह साधु होता है, साधुता हमारे भीतर…

उत्तम आकिंचन्य
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उत्तम आकिंचन्य पिता की मृत्यु के उपरांत पिता की संपत्ति को लेकर चार भाइयों के मध्य अंतर-मंथन चल रहा था। एक प्रकार का द्वन्द चल रहा था, एक कह रहा…

उत्तम ब्रह्मचर्य
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उत्तम ब्रह्मचर्य आज बात ‘ब्रह्मचर्य धर्म’ की है। ब्रह्मचर्य जो हमारी साधना का मूल है, सभी साधनाओं में ब्रह्मचर्य को सबसे प्रमुख स्थान दिया गया है। एक तरफ ब्रह्मचर्य है…