माँस के व्यापार का विरोध कैसे दर्ज कराएँ?

150 150 admin
शंका

आपने बताया कि भारतीय संविधान में “अहिंसा परमो धर्मः” का विशेष स्थान है पर बड़ा दुःख का विषय है कि आज भारत जैसा अहिंसक देश माँस निर्यात के क्षेत्र में पूरे विश्व में दूसरे या तीसरे नम्बर पर आ गया है। इस गहन और संवेदनशील विषय पर पर हम चाहते हैं कि आप कुछ ऐसा उपदेश या कुछ ऐसा मार्ग दर्शन आज के युवा साथियों को दें ताकि वो सोशल मीडिया या अन्य प्रसार-प्रचार के माध्यमों के द्वारा इस माँस-निर्यात के विरोध में अपना विरोध प्रकट कर सकें। आचार्य विद्यासागर जी महाराज, जिन्होंने इस माँस-निर्यात विरोध में सबसे पहले अपना मार्ग दर्शन प्रदान किया, उनकी इस संकल्पना को हम साकार कर सकें और माँस निर्यात का विरोध हो सके। इस में अपना मार्ग दर्शन प्रदान करें।

समाधान

जो बात आप छेड़ रहे हैं ये बहुत गम्भीर है और इसके लिए बहुत बड़े आन्दोलन की ज़रूरत है। सम्पूर्ण देश में जागरूकता की जरूरत है। मैं तो ये कहता हूँ कि आज की सोशल मीडिया के युग में लोग जागरूकता अपनाएँ। नरेन्द्र मोदी के एक व्याख्यान की क्लिप लोगों ने मुझे दिखायी थी जो उन्होंने प्रधानमन्त्री बनने से पहले माँस निर्यात के विरोध में दिया था। मैं तो ये कहना चाहूँगा कि देश भर के लोग नरेन्द्र मोदी जी के पास क्लिप के सन्दर्भ के साथ अपना प्रतिवाद भेजें कि “प्रधानमन्त्री बनने से पहले आपने जो बात बताई थी आज आपके हाथ में सत्ता की डोर है और भारत जैसे अहिंसा प्रधान देश में माँस निर्यात जैसे क्रूर कृत्य से होने वाले कलंक को धोने की सामर्थ्य केवल आपके ही पास है और आपसे ही देश आशा रखता है। अब आप इस कार्य को जितनी जल्दी कर सकें उतना अच्छा होगा क्योंकि इस धरती को अब और लहू-लुहान होते हुए हम देख नहीं सकते।” इसलिए आप प्रयास करें, पुरूषार्थ करें तो सारे कार्य होंगे। 

एक माहौल बनाया जाये, परिणाम आयेगा। जहाँ तक मुझे इसकी अँदरूनी जानकारी मिली है ये प्रकरण सरकार के एजेंडे में है और बहुत जल्दी हम भावना भाएँ कि यह कार्य अति शीघ्र हो। इसके साथ ही एक बात मैं और कह देना चाहता हूँ कि मेरे पास अभी कुछ लोगों का मैसेज आया, अभयसागरजी महाराज ने एक मैसेज पहुँचाया कि अभी जितने भी आई.आई.टी इंस्टीट्यूट हैं उनमें जो मेस (भोजनालय) है उसमें शाकाहारी व माँसाहारी व्यंजन एक ही जगह पकते हैं। यह सभी शाकाहारी बच्चों के लिए बहुत दुखदायी होता है। उसके लिए सभी को वर्तमान में जो मानव संसाधन विकास मन्त्री हैं सुश्री.स्मृति ईरानी, जो खुद अहिंसावादी हैं उनको पत्र लिखना चाहिए। ई-मेल करें, पत्र लिखें या अन्य माध्यम से मैसेज करें उसका प्रारूप लोगों को उपलब्ध करा दिया जाये। उनको ये लिखें कि हमारे जितने भी शैक्षिक संस्थान है वहाँ पर शाकाहारी लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उनकी रसोई अलग बनाई जाये ताकि वो अपने धर्म का पालन कर सकें। ये प्रतिवाद आप लोगों को न केवल अपने स्तर पर अपितु अपने सम्पर्क में आने वाले के सभी के माध्यम से पहुँचाना चाहिए। आज शाकाहारियों की भी बहुत बड़ी संख्या है। उस तरीके से करें तो काम बहुत होगा।

Share

Leave a Reply