तपस्या करने की साधना न हो, तो दीक्षा कैसे धारण करें?

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शंका

यदि तपस्या करने की साधना ना हो तो दीक्षा कैसे धारण करें?

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समाधान

तपस्या करने की साधना ना हो तो दीक्षा कैसे धारण करें!, सुकुमार मुनि से जाकर पूछो| उनके पास तपस्या करने की कोई साधना नहीं थी, उन्हें सरसों का दाना चुभता था| आज जो लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं उन से मजबूत हैं, अपने को तो कंकड़ भी नहीं चुभते, सरसों के दाने तो बहुत दूर की बात है| पर सुकुमार मुनिराज से पूछो जिनको सरसों का दाना चुभता था| जब बोध जगा, घर छोड़कर निकल गए; शालिनी अपने तीन बच्चों के साथ तीन दिन तक नाखून से लेकर कमर तक चूट चूट के खाती रही, ऊफ तक  नहीं किया| जिसे सरसों का दाना चुभता था उसको शालिनी के दंश नहीं चुभे| कहाँ से आयी शक्ति ? क्या शरीर बदल गया, सहनन बदल गया? कुछ नहीं बदला?, क्या बदला?, मन बदल गया! 

बस मैं इतना ही कहना चाहता हूँ, यह शरीर कभी साधना को राजी नहीं होता और शरीर से कभी साधना होती ही नहीं; मन साधना करता है और मन से साधना करने के लिए मन को साधना पड़ता है| मन साध लो साधना तुम्हारे साथ जुड़ जाएगी चाहे जैसी तपस्या कर सकते हो|

Edited by: Pramanik Samooh

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