शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक परिणति में भावना योग का क्या महत्त्व है?
हम अगर भावना योग अपनाते हैं तो तीनों स्तर पर हमारा परिवर्तन होता है। हम तन को स्वस्थ करते हैं तो हमारी शारीरिक स्थिति के सुधार का आधार बनता है। मन में पवित्रता आती है, हमारी मानसिक शांति उत्पन्न होती है तो मानसिक पवित्रता को प्रकट करता है और इसके बल पर हम अपनी आध्यात्मिक या चैतसिक गुणों का विकास कर सकते हैं। हमारा सारा अध्यात्म भावना योग पर ही विकसित हुआ है। हमारी भावनाएँ जैसे-जैसे निर्मल होती हैं, हमारे आत्मिक गुणों का विकास उत्तरोत्तर होने लगता है। भावना के चरम पर पहुँच जाने पर हम अपनी सारी विकृतियों का प्रक्षालन करके परमात्मा हो सकते हैं। यथार्थ से देखा जाए तो भावना योग का सबसे अच्छा लाभ तो अपनी आध्यात्मिक चेतना का विकास है। हाँ, उसके साथ अनुषांगिक रूप से हमारी मानसिक और शारीरिक स्थितियों में भी सुधार आ जाता है। आप जब भावना योग करेंगे तो यह सब अनुभव करेंगे।
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