स्वाध्याय का नियम टूटने पर क्या करें और सामायिक क्या है?

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शंका

हम स्वाध्याय का नियम लेते हैं लेकिन बीच-बीच में टूट जाता है, क्या करें? स्वाध्याय या सामायिक साधना में क्या अंतर है?

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समाधान

जो व्यक्ति नियम लेकर के तोड़ देता है वह बहुत कच्चा होता है, उसे नियमों में दृढ़ होना चाहिए। नियम पालने के लिए लिए जाते है, तोड़ने के लिए नहीं। इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति ने स्वाध्याय का नियम जरूर लिया है, पर उसकी उसमें रुचि कम है। टूटना और तोड़ने में अंतर है। किसी परिस्थिति वश नियम का टूट जाना अलग बात है परन्तु नियम को जानबूझकर तोड़ देना अच्छी बात नहीं है। 

 सामायिक साधना भी एक प्रकार का स्वाध्याय है। जो ठीक ढंग से स्वाध्याय करता है वही सच्चे अर्थों में सामायिक और ध्यान कर सकता है। अपने मन को रमायेगें कैसे? किस पर एकाग्रता रखेंगे, जब तक आगे पीछे का ध्यान ना हो। तो स्वाध्याय से ध्यान एक आगे की कक्षा है और आगे की कक्षा में वही जा पाता है जो पहली कक्षा में पारंगत हो।

Edited by: Pramanik Samooh

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