हमें किसकी पूजा करनी चाहिये?

150 150 admin

शंका

हमारे आराध्य देव पारसनाथ भगवान हैं। माँ पद्मावती के भी आराध्य देव पार्श्वनाथ भगवान हैं। माँ पद्मावती की पूजा में तेरापंथ- बीसपंथ को लेकर इतना मतभेद क्यों?

विडियो

समाधान

एक बार एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि-“पद्मावती की पूजा करने में क्या दोष है? आपने वही प्रश्न पूछा है, थोड़ा फैला के पूछा है। जिसको करना है वह अपनी जगह है, करें ना करें, मैं उसकी टिप्पणी नहीं करता। लेकिन जो बात है आगम की, वह मैं आपसे कहना चाहता हूँ।

मैंने पूछा कि “ठीक है, दोष और गुण की बात बाद में करूँगा, पहले यह बताओ कि आप पद्मावती की पूजा करते हो, तो क्यों करते हो, किस लिए करते हो? पूजा करना चाहिए, नहीं करना चाहिए यह प्रश्न बाद का है”

लोग भोग के लिए पद्मावती की या उन जैसे अन्य देवी देवताओं की पूजा करते हैं। क्या वह भोग देने में समर्थ हैं? मैंने जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि “महाराज जी, ऐसा कहा जाता है कि उनकी पूजाअर्चा करने से रोग, शोक और संताप नहीं होता।” मैंने कहा “बहुत अच्छी बात है। तुम जो कह रही हो, मैं मानता हूँ। पर यह बताओ कितने साल से पूजा कर रहे हो?” “महाराज २२-२४ साल तो हो गए।” “तुम्हारे घर में किसी को रोग हुआ?” “महाराज, हमारे घर में कोई ना कोई तो बीमार बना ही रहता है।” “तुम्हारे यहाँ कोई शोक नहीं आया?” बोले “महाराज, अभी साल भर में ३ बड़ी हत्याएँ हुई। मेरे एक भाई ने आत्महत्या कर ली, मेरी चाची एक्सीडेंट में मर गई और मेरे बड़े पिताजी जो थे वह हार्ट फेल होकर के मरे। रोग भी हुआ और शोक भी हुआ।” हमने पूछा “तुम लोग टेंशन फ्री तो रहते होंगे।” तो अपने पति की ओर इशारा करते हुए बोली कि “सबसे ज्यादा टेंशन तो इनसे है।” तो हमने उनसे कहा कि “तुम कहती हो कि रोग, शोक और संताप उनकी पूजा से नष्ट हो जाते हैं और तुमने अपने ही मुख से कहा है कि तुम्हारे यहाँ रोग भी है, शोक भी है, संताप भी है, तो फिर पूजा करने का औचित्य क्या? फिर क्यों पूजते हो? पूजना या नहीं पूजना यह तुम्हारी इच्छा की बात है। पर यह जब तीनों बातें तुम्हारे साथ दिख रही है, फिर?”

एक बार किसी ने कहा कि ऐसा करने से सब कुछ ठीक हो जाता है। हमने कहा कि “ठीक है, तुम सिद्ध कर दो कि इनकी पूजा करने से रोग मिट जाते हैं। सबसे बड़ा समर्थक मैं बनूँगा, आगम एक तरफ रख दूँगा।” सबसे बड़ा समर्थन मैं करूँगा अगर तुम यह सिद्ध कर दो कि किसी भी देवी देवता की पूजाअर्चा करने वाले को जीवन में कभी बीमारी नहीं आती, मैं समर्थन करूँगा, बड़े-बड़े मंदिर बनवाने की प्रेरणा दूँगा। देश के सारे अस्पताल बंद हो जाएँगे, जनता का कल्याण हो जाएगा! है मानने को राज़ी हैं आप?

इसलिए बंधुओं एक ही लाइन में बात कहता हूँ, भगवान भी तुमको रोग, शोक, संताप से मुक्त नहीं कर सकते! देवी देवता कहाँ, भगवान भी तुम्हारे संकटों को टाल नहीं सकते! खुद पारसनाथ भगवान पर उपसर्ग आया, ७ दिन तक उपसर्ग रहा, क्या किया उन्होंने? तुम तो कहते हो, “मेटो मेटो जी संकट हमारा”। पारसनाथ भगवान किसके पास गये? ” महाराज ! धरणेन्द्र ने और उसकी देवी ने उनका संकट निवारा”, तो ७ दिन तक कहाँ सो रहे थे? ७ दिन तक तमाशा क्यों कराया?

ध्यान रखना भगवान की वाणी पर जो आस्थावान बनते हैं और भगवान की चरण शरण में रहते हैं, वह भगवान के संपर्क में आकर अपने संकटों को टाल भले नहीं पातें लेकिन भगवान के सानिध्य से अपने आप को संभाल ज़रूर लेते हैं। तो भगवान हमारे संकटों को टालते नहीं, संकटों में हमे संभालते हैं; इसीलिए हम भगवान की पूजा करते हैं। कर्म सिद्धांत पर विश्वास करो, कर्मकांड पर नहीं। हमारे जीवन के सारे संयोग, सुख-दुःख हमारे शुभ अशुभ कर्मों के परिणाम से होते हैं। और अगर वो संयोगों को बदलने की इच्छा है, तो कर्मों में परिवर्तन लाओ। यह कर्मों का परिवर्तन किसी देवी देवता की पूजा से नहीं होगा, भगवान की आराधना से होगा। वीतराग की पूजा से कर्म कटते हैं और रागी की पूजा से कर्म बंधता है। अब आपको जो करना है वह आप जानो, मैंने तो अपनी बात बता दी।

Edited by: Pramanik Samooh

Leave a Reply