जैन धर्म का अस्तित्व पूरे विश्व में है, किंतु पंचकल्याणक केवल भारतवर्ष में; ऐसा क्यों?

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शंका

जैन धर्म का अस्तित्व पूरी दुनिया में पाया जाता है, पर भगवान के पाँचों कल्याणक भारत में ही क्यों होते हैं?

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समाधान

देखो ऐसा है कहते हैं भव भागनवश वशाय”! पुण्यवान जीवों के यहाँ ही तीर्थङ्करों का जन्म होता है।

यह बात सही है कि आज भारत के अलावा विश्व के अनेक भू-भागों में जैन धर्मावलम्बी हैं। सुदूर अतीत में भी भारतवर्ष से बाहर काफी-कुछ इलाकों में जैन धर्म के प्रसार के संकेत मिलते हैं। लेकिन तीर्थंकरों के कल्याणकों का जहाँ तक सवाल है, उसके पीछे मुझे एक ही कारण समझ में आता है कि सारे विश्व में सबसे पुण्यशाली धरती भारत रही है। अतीत में भारत को जगतगुरु कहा जाता था। 

ये भारतवर्ष एक ऐसा देश था जिसे सोने की चिड़िया के रूप में जाना जाता था। 1835 में जब लार्ड मैकॉले भारत आया, हम बहुत अतीत की बात में नहीं जा रहे हैं, तो उसने पूरे भारत की यात्रा करने के बाद जो विवरण लिखा, उस पर ब्रिटिश संसद, लंदन में उसने अपना एक वक्तव्य दिया। उसमें लिखा कि- “मैंने भारत की चतुर्दिक् यात्रा की है और मुझे भारत में एक भी भिक्षुक, एक भी याचक और एक भी चोर दिखाई नहीं पड़ा। यहाँ के लोगों में आध्यात्मिकता बहुत गहरी भरी पड़ी है।” उसका वक्तव्य काफी लंबा था। और उसमें एक चीज़ उसने लिखी थी कि – “भारत जैसे देश को अगर हम अपने कब्जे में लेना चाहते हैं, तो एक उपाय है कि यहाँ के लोगों की जो मूल-संस्कृति है, उसे हम तोड़ दें। हम इनकी शिक्षा पद्धति को बदल दें। जब तक इनके दिल-दिमाग में हम यह नहीं बैठा देते हैं कि जो कुछ भी इंग्लिश है, वही सही है, तब तक हम इन पर कब्जा नहीं कर सकते हैं। और मैं यह आह्वान करता हूँ कि इनकी शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाया जाये। और तब हम इन्हें आसानी से अपना गुलाम बना सकते हैं।” इस आशय का वक्तव्य मैकॉले ने दिया। और मैकॉले की शिक्षा पद्धति का ही यह दुष्परिणाम है कि अंग्रेज भले चले गये, अंग्रेजियत आज भी लोगों के ऊपर हावी है। 

तो भारत पुरातन काल में बड़ा पुण्यशाली राष्ट्र रहा है, यहाँ पुण्यवान लोग ही जन्म लेते थे। काल के प्रभाव से वर्तमान में उसकी स्थिति कुछ बिगड़ी है, लेकिन मुझे लगता है आने वाले दिनों में भारत का भविष्य फिर उज्जवल होगा। और भारत विश्व गुरु होने के गौरव को प्राप्त करेगा। तो निश्चित उस पुण्य के प्रताप स्वरूप सारे साधु, महान आत्माओं का जन्म भारत में हुआ। हमारे तीर्थङ्करों के सारे कल्याणक भारत में ही हुए। और इसके अलावा कोई दूसरा कारण मुझे समझ में नहीं आता।

Edited by: Pramanik Samooh

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