सिद्ध भगवान को कर्ता क्यों कहा गया है?

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शंका

सिद्ध भगवान अपने निज स्वभाव में शुद्ध परिणमन करते रहते हैं इसीलिए उन्हें कर्ता भी कहा है। यह समझ में नहीं बैठता?

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समाधान

कोई भी द्रव्य अपने परिणमन से शून्य नहीं होता और अपना परिणमन ही द्रव्य का कर्तत्व है अर्थ, क्रिया, कारित प्रत्येक वस्तु में होती है और वही उसका परिणमन कहलाता है।

Edited by: Pramanik Samooh

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