स्पष्ट दर्पण सा जीवन है, गुरु के चित्र ख़िरते हैं,
तुमरे दर्शन से गुरुवर जी, आचार्य श्री जी दिखते हैं
शंका समाधान से गुरुवर के, हृदयकमल भी खिलते हैं,
हो छोटी बड़ी या कैसी शंका, सब समाधान मिलते हैं।
प्रवचन की तो बात क्या है, सोए हुए भी जगते है,
गूढ से गूढ विषय भी अब तो, सरल लगने लगते है
14 गुणस्थानों का सार जब, हम पाने में विफलते हैं,
प्रत्यक्ष रूप से जाने उनको, आइये गुणायतन चलते हैं

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