गर्भपात महापाप है, यह अमानवीय कृत्य है।

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गर्भपात एक बहुत क्रूर कर्म है, इसे कराने की बात तो दूर सोचना भी नही चाहिए। गर्भपात एक जीते-जागते जीव की हत्या है अपने ही कलेजे के टुकड़े की हत्या है , अपने ही हिये के लाल का हलाल है। इसी का दुष्परिणाम है कि हमारे समाज के लड़के लड़कियों का लिंगानुपात बिगड़ रहा है इसी कारण आज लड़को की शादिया नही हो पा रही है। सोचने का विषय है कि जिस दिन समाज नारी विहीन हो जायेगा, उस दिन समाज का रूप कितना बिगड़ जायेगा? जिस दिन नारी चली जायेगी उस दिन समाज खत्म हो जायेगी। नारी एक ममता ,करुणा, लक्ष्मी, क्षमा, दुर्गा और शक्ति का प्रतीक है।

जिस दिन नारी की करुणा, ममता, क्षमा, लक्ष्मी, दुर्गा और शक्ति खत्म हो जाएगी समाज कितना क्रूर और बर्बर होगा। एक सामान्य व्यक्ति की हिंसा करना पाप है, लेकिन इससे भी बड़ा पाप है अपने पेट में पलने वाले बच्चे की हत्या करना। क्योंकि ये हत्या है वंश की , ये हत्या है करुणा की, ये हत्या है मातृत्व की, ये हत्या है धर्म की। जिस संतान की हत्या की जाती है उसमें क्या पता कितनी योग्यता है, कौन जानता है? कल जन्म लेकर वह महात्मा बन देश दुनिया का उद्धारक बन जाए ,पर सारी सम्भावनाओ को पेट में ही समाप्त कर देना कितना बड़ा पाप है। जो माता पिता ऐसा करते है अपने ही खून जुल्म करते है हम सभी को जागना चाहिए। हम सभी को इस कृत्य से बचना चाहिए। गर्भपात हमे कभी नही करना चाहिए और न ही हमे सोचना चाहिए।