भगवान् बाहुबली

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बाहुबली कौन थे ?
बहुत समय पहले जब राजा ऋषभदेव ने संन्यास लेने का निश्चय किया तब उन्होंने अपना राज्य अपने १०० पुत्रों में बाँट दिया। भरत चक्रवर्ती जब सभी राज्य जीत कर आये तो उन्होने अपने भाई बाहुबली से अधीनता स्वीकर करने को कहा। बाहुबली को इस पर क्रोध आया क्योंकि बाहुबली का राज्य उनको उनके पिता द्वारा दिया गया था। भरत और बाहुबली के बीच में तीन युद्ध हुए और तीनो में बाहुबली ने भरत को हरा दिया। बाहुबली को संसार का स्वरूप जानकर वैराग्य प्रकट हुआ और उन्होने एक साल तक खङे होकर कठोर तपस्या की। वह समस्त राग-द्वेष से मुक्त हो गये और उन्होने परम आनन्द एवं ज्ञान की अवस्था को प्राप्त किया।

भगवान बाहुबली तीर्थंकर नहीं हैं, फिर अभिषेक क्यों?
केवल तीर्थंकरों का ही अभिषेक नहीं बल्कि जिन प्रतिमा का भी अभिषेक होता है और इसका वर्णन आगम में भी है| जितने भी अकृत्रिम जिनालय हैं जिनमे चतुरनिकाय के देव अभिषेक करते हैं , पूजन करते हैं , वे सब जिन और अरिहंत की ही पूजा करते हैं| भगवान बाहुबली तीर्थंकर नहीं हैं, पर वे जिन और अरिहंत हैं|

बाहुबली भगवान का महामस्ताभिषेक 
यह एक ऐसा उत्सव है जिसमे भगवान बाहुबली की विशाल ५७ फ़ीट ऊँची प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है| यह प्रतिमा दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के श्रवणबेलगोला गांव में स्थित है| १२ साल के अन्तराल में यह अभिषेक किया जाता है|

अभिषेक का प्रभाव 
इसका महत्व वो ही जान सकता है जिसके मन में श्रद्धा है और जिसने भगवान के स्वरूप को समझा हो| महामस्ताभिषेक में कलश धारने का सौभाग्य प्राप्त करने वालों के ह्रदय में जो विशुद्धि की लहरे उठती है, वो अद्भुत होती है और उनके मन में एक अलग प्रकार का उल्लास जाग्रत होता है | जो इस भाव को समझ एवं जान पाता है उसके जीवन में बदलाव आ जाते हैं और जीवन आनंदमयी हो जाता है| साक्षात अभिषेक करने वालो की बात तो दूर, जो TV पर भी प्रभु के इस अभिषेक को देखता है, वह धन्य-धन्य हो जाता है।

क्या भगवान के अभिषेक में लाखों लीटर दूध आदि उपयोग करना जरुरी है ? 
भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा की नित्य अभिषेक की व्यवस्था सहज नहीं इसलिए हज़ारों वर्षों से ये परंपरा चली आ रही है। हम दिगंत व्यापी प्रतिमा का अभिषेक १२ साल में एक बार करेंगे और इतने ठाठ-बाठ से करेंगे ताकि दुनिया भर में भगवान बाहुबली का नाम हो और वीतराग धर्म की प्रभावना हो| अगर यह अभिषेक सामान्य रूप से बिना प्रचार प्रसार के किया जाता तो आज भगवान बाहुबली विश्व व्यापी नहीं होते और इस विशाल आयोजन का ही परिणाम है के आज दुनिया भर से समस्त धर्मो के श्रद्धालु भी भगवान बाहुबली के महामस्तकाभिषेक में सम्मिलित होते हैं और इस अलौकिक, अनुपम एवं अदभूत दृश्य का आनंद लेते हैं|