संगति का जीवन पर प्रभाव

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स्वभाव पर किसका प्रभाव?

विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों की दृष्टि से व्यक्ति के स्वभाव पर मुख्य रूप से दो बातों का प्रभाव होता हैं-
(1) आनुवांशिकता (heredity)
(2) संगति (Companionship)
आनुवांशिक गुणों के अनुरूप ही व्यक्ति भीतर दोष/गुण आते हैं, जो आगे चलकर हमारा स्वभाव बन जाते हैं। लेकिन व्यक्ति के स्वभाव पर सबसे ज्यादा प्रभाव संगति का होता है। वो जैसे वातावरण में, जैसे लोगों के बीच रहता है, उसका स्वभाव वैसा हो जाता है।

“जैसी संगत, वैसी रंगत”

कुरल काव्य में लिखा है कि ‘लोगों का ये भ्रमपूर्ण विश्वास है कि मनुष्य का स्वभाव उसके मन में रहता है। अपितु उसका वास्तविक निवास तो उस गोष्ठी(मित्र मंडली) में है, जिनके मध्य वो रहता है’। मनुष्य जैसे लोगों के बीच रहता है, उसके भाव, विचार, व्यवहार, चरित्र वैसे हुए बिना नहीं रहते। इसलिए संगति को बहुत महत्त्व दिया गया है। पानी को जैसी मिट्टी पर बहा दो, पानी वैसा हो जाता है। मन पानी की तरह है, वो जैसे वातावरण में रहता है, वैसा होता है। यदि व्यक्ति हिन व्यक्तियों के मध्य रहता है, तो उसकी बुद्धि भी हिन हो जाती है। समान व्यक्ति के साथ रहता है, तो समान रहती है और विशिष्ट व्यक्ति के साथ रहता है, तो उसकी मति में वैशिष्ट प्रकट हो जाता है। मनुष्य का जीवन एक लता की तरह है। यदि वो लता किसी स्तंभ का आश्रय पाती है, तो आसमान को छूने में समर्थ हो जाती है और वही लता यदि किसी कुएं के पाट में उतर जाए, तो अधोगामी हो जाती है, नीचे ही जाती है।

संगति कैसी हो ?

व्यक्ति जैसे लोगों के मध्य रहता है, जिनके साथ उठता-बैठता है, खाता-पीता है, उनका उसके मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि वो नकारात्मकता से भरे व्यक्ति के संपर्क में रहता है तो ये तय है कि उसकी नकारात्मकता बढ़े बिना नहीं रहेगी और यदि सकारात्मक व्यक्ति के साथ रहता है तो अनायास उसकी सकारात्मकता बढ़ जाती है। ऐसा कहा जाता है कि व्यक्ति जिन पांच व्यक्तियों के मध्य सबसे अधिक समय व्यतीत करता है, तो उसका स्वभाव उन सब का एवरेज हो जाता है। इसलिए सदैव उन लोगों के मध्य रहने का प्रयास करना चाहिए, जो सकारात्मक हों, संस्कारवान हों और हमेशा सही दिशा में चलने के लिए प्रेरित करें।

Edited by Abhishek Jain, Delhi

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