क्या सल्लेखना लेने के बाद वापसी सम्भव है?

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शंका

अगर किसी ने सल्लेखना की समयसीमा बाँध ली पर अभी उसकी आयु शेष रह गयी, तो परिस्थिति वश सल्लेखना में परिवर्तन किया जा सकता है क्या?

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समाधान

हमारे यहाँ सल्लेखना व्यक्ति की स्थिति को देखकर के ही विधान किया है। दो प्रकार की सल्लेखना है, एक संक्षेप प्रत्याख्यान और एक वृहद प्रत्याख्यान या नियम सल्लेखना और यम सल्लेखना। नियम सल्लेखना में तो reverse (उलट) होते ही हैं, यम सल्लेखना में रिर्वस होने की बात नहीं होती। लेकिन कई ऐसे प्रसंग हुए हैं जब व्यक्ति ने नियम सल्लेखना ली। यम सल्लेखना अन्तिम घड़ियों में दी जाती है, जब व्यक्ति की सम्भावनाएँ प्रायः समाप्त होती है तब यम सल्लेखना ली जाती है। प्रारम्भिक अवस्था में नियम सल्लेखना ही ली जाती है। नियम सल्लेखना का एक उदाहरण मैं आपको बताता हूँ, गुरुदेव के सानिध्य में जबलपुर में एक महिला जो असाध्य रोग से ग्रसित हो गयी थी, बहुत पुरानी बात है १९८४ की बात है। उस महिला की सल्लेखना की प्रक्रिया लगभग डेढ़ महीने चली, उन्हें केवल जल पान दिया गया। वह सल्लेखना की क्रिया ही उनके लिए चिकित्सा बन गयी और आपको आश्चर्य होगा वह महिला स्वस्थ हो गयी। वह नियम सल्लेखना में थी और जब उनकी स्थिति स्वस्थ हो गयी गुरुदेव ने उन्हें लौटा दिया।

Edited by: Pramanik Samooh

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