घटनाओं पर प्रतिक्रियाएँ किस कर्मोदय से?

150 150 admin

शंका

नमोस्तु महाराजश्री। हमारी एक भावना है कि हम किसी से कुछ कह देते हैं। तो उसके बाद में ऐसा लगता है कि क्यों कह दिया? तो कौन से कर्म के उदय से कहते हैं और फिर कौनसे कषाय से परेशान हो जाते है?

विडियो

समाधान

हमने कह दिया कुछ कह दिया और बाद में सोचते हैं कि ऐसा हमने क्यों कह दिया? १४८ कर्म में ऐसा कोई कर्म हमको देखने में नहीं मिला जिससे हम कहें कि PARTICULARLY ऐसा कर्म कर सकते हैं पर मुझे ऐसा लगता है कि जिनके अंदर ‘अधीरता और अविवेक’ नामक कर्म का उदय होता है वह ऐसा करते हैं और बाद में पश्चाताप करते हैंइसीलिए अपनी कषायों को शांत करो और अधीरता और अविवेक को दूर करने का उपाय, धैर्य और विवेक से काम करो बोलने के पहले सोचो, बोलने के बाद नहीं 

सोच कहे सो सूर है और कह सोचे सो धूर। 

इसलिए सोच करके कहिए, कह कर के मत सोचिएधैर्य अभ्यास कीजिए, धीरज का अभ्यास  कीजिए, अधीरता का नहीं

Edited by: Pramanik Samooh

Leave a Reply