क्या निर्माल्य का भक्षण उचित है?

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शंका

क्या निर्माल्य का भक्षण उचित है?

समाधान

ऐसा हम कह नहीं सकते कि पञ्चम काल में जन्म लेने वाले को पूर्व पर्याय में सम्यक दर्शन नहीं हुआ होगा। जब सम्यक दर्शन को प्राप्त करने वाला जीव नरक भी जा सकता है, उस भव में नहीं भवान्तर में, और सम्यक दर्शन को प्राप्त करके उपशम श्रेणी चढ़ने वाला जीव अर्धपुद्गगल परावर्तन काल तक निगोद आदि में भ्रमण भी कर सकता है, तो पञ्चम काल में जन्म लेने में कोई आश्चर्य नहीं है। ऐसा मत मानो कि हम आज इस पञ्चम काल में जन्म लिए हैं, तो अनादि मिथ्या दृष्टि रहे हैं। हमने कभी सम्यक्तव भी पाया होगा, लेकिन यह पक्का है कि पिछले भव में हम सम्यक दृष्टि नही रहे होंगे क्योंकि यदि सम्यक के साथ मरे होते, तो यहाँ नहीं होते। इसलिए पञ्चम काल में जन्म लेने के पहले हम सम्यक दृष्टि हुए या नहीं हुए, यह तो भगवान जानते हैं, पर अगर पञ्चम काल में जन्म लेकर के भी हमने सम्यक दर्शन प्राप्त कर लिया, तो हमारी पञ्चम गति होने में कोई बाधा नहीं है। इसलिए आज की बात देखो, अतीत की बात देखने की कोई ज़रूरत नहीं है।

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