क्या समितियाँ बनाकर श्रावक का स्थितिकरण करना चाहिये?

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शंका

आज के समय में, शिथिलीकरण के दौर में क्या समितियाँ या कमेटियाँ बनाकर श्रमण या श्रावक का स्थितिकरण करना चाहिये, क्या ऐसा कुछ कर सकते हैं?

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समाधान

स्थिर व्यक्ति से स्थिर समाज का निर्माण होगा, पहले खुद का स्थितिकरण करो फिर औरों का स्थितिकरण होगा। अपने सम्यक्त्व को संभालो सबका सम्यक्त्व स्वतः संभलने लगेगा। पहले अपने आप को स्थिर करना होगा, हम एकदम से सामाजिक स्तर पर व्यवस्थाएँ बनाने लगते हैं। यह स्थितिकरण अवस्था की बात करता है, व्यवस्था की नहीं। हम हर किसी की अवस्था को देखें, उस अवस्था को बनायें रखने में हम जितना सहभागी बन सके, बनें। हम ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बना सकते कि हर व्यक्ति को एक आदेश थोप करके परिवर्तित कर सके, ये ह्रदय परिवर्तन की बात है।

Edited by: Pramanik Samooh

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