क्या मंदिर में क्षेत्रपाल आदि देवी देवताओं को पूजना उचित है?

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शंका

आगम के अनुसार क्षेत्रपाल, पद्मावती माता, चक्रेश्वरी माता आदि जितने भी देवी देवता हैं उनको पूजना उचित है या नहीं? यदि नहीं, तो फिर इन सब की मूर्तियाँ अपने मन्दिरों में क्यों होती हैं? और यदि मन्दिर में हैं और हम पूजते हैं, तो क्या पाप का बंध होता है?

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समाधान

हमारा जैन धर्म अहिंसा और वीतरागता को महत्व देता है। हम अहिंसा और वीतरागता के उपासक है, तो हमारे मूल आराध्य तो वीतराग देव-शास्त्र-गुरु हैं। इसके अतिरिक्त जो कुछ भी आए, अलग-अलग समयों में अलग-अलग रीति से आए। 

हमारे आचार्य तो यही कहते हैं ‘वीतराग को भजो, वीतरागता को पूजो तभी वीतरागता को प्राप्त कर सकोगे।’

Edited by: Pramanik Samooh

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