स्याद्वाद का क्या अर्थ है?

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शंका

भगवान महावीर के चार मूल गुण सिद्धांत बताए गए हैं, अहिंसा, अपरिग्रह, स्याद्वाद, अनेकांत! इसमें जो स्याद्वाद आया है उसका मतलब क्या है?

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समाधान

स्याद्वाद का अर्थ है सापेक्षता का सिद्धांत अर्थात theory of relativity! जो तुमने कहा, वही सही नहीं है; तुमने जिस दृष्टि से कहा, वह तो सही है, पर सामने वाले की दृष्टि से भी बात सही कही जा सकती है। जैसे मैं तुमसे एक सवाल करूँ- हिमालय कहां है? कौन सी दिशा में है? हमारे भारत के किस दिशा में है? North (उत्तर दिशा) में है ना! और यही प्रश्न किसी चीन के आदमी से पूछा जाएगा, तो क्या बोलेगा? ‘हिमालय (south) दक्षिण दिशा में है। यह कैसे हो गया? क्या झगड़ा करेंगे? क्या कहेंगे? भारत के north में हैं और चाइना के south में है। बस इसी को समझने की विधि का नाम स्याद्वाद है। 

दूसरा उदाहरण देते हैं, तुम अपने पिताजी को क्या बोलते हो? ‘पापा’! तुम्हारे दादा जी तुम्हारे पापा को क्या बोलते हैं? ‘बेटा’! तुम अपने पापा को पापा बोलते हो और तुम्हारे दादा तुम्हारे पापा को बेटा बोलते हैं। तुम्हारे पापा, तुम्हारे पापा हैं, लेकिन तुम्हारे दादा के बेटे हैं, बाप और बेटा होना अलग अलग है ना! बस इसी को समझाने का नाम स्याद्वाद है।

Edited by: Pramanik Samooh

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