पूजा करते समय कैसे फल चढ़ायें?

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शंका

अधिकांश पूजाओं में मोक्ष फल की प्राप्ति के लिए सचित्त फल जैसे नींबू, आम, केला, नारंगी अर्पित करने की बात क्यों होती है?

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समाधान

फल की जब चर्चा आती है, पूजा में कवियों ने लिखा है, भगवान के चरणों में फल चढ़ाते हैं। तो जो फल चलन में आते हैं, उन फलों का उल्लेख कवियों ने लिख दिया। पर ऐसा ज़रूरी नहीं है कि हम वही चढ़ायें, जो फल लिखे हैं। हमारी भावना में हम कोई भी फल का प्रयोग रख सकते हैं। चढ़ाने के लिए फल चढ़ायें, कई पूजाओं में पिस्ता, बादाम आदि का भी उल्लेख है, तो हम अपने विचार और विवेक से प्रयोग करें। यदि आपके यहाँ सचित्त पूजा की प्रक्रिया नहीं है, अचित्त है, तो आप अचित्त पूजा करके भी आनन्दित हो सकते हैं। जो यह तर्क दिया जाता है कि सूखे फल चढ़ाओगे, तो सूखे रह जाओगे और हरे फल चढ़ाओगे, तो हरे रहोगे। तो मैं आपको यह कहता हूँ, फल चढ़ाने से ही अगर जीवन हरा होता है, तो फल के टोकने चढ़ा दो, हरियाली बनी रहनी चाहिए। न भूतो न भविष्यति, अपने भावों को अर्पित करके ही आप अपने जीवन को समृद्ध बना पाओगे। इसलिए पूजा-अर्चा में बाकी बातों का मोह त्याग कर, अपनी भाव विशुद्धि की अभिव्यक्ति का परिपूर्ण ध्यान रखना चाहिए।

Edited by: Pramanik Samooh

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