सामान्य श्रावक सल्लेखना के लिए क्या सावधानी रखें?

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शंका

एक सामान्य श्रावक को अपनी सल्लेखना में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

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समाधान

जो सामान्य श्रावक है यदि उन्हें सल्लेखना लेनी है, तो प्रारम्भ से ही अपनी मानसिकता तैयार करनी चाहिए। एक साधक ही सल्लेखना या संथारा ले सकता है, सामान्य व्यक्ति नहीं। 

जैसे-जैसे अवस्था बढ़े अपनी सांसारिक भोगासक्ति, मोह-माया को कम करना चाहिए और अपनी शारीरिक साधना को भी मजबूत बनाना चाहिए। धीरे-धीरे तपस्या को बढ़ाकर कष्ट-सहिष्णु बनना चाहिए। अपने खान-पान में शुद्धि और सयंम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इन्द्रिय लोलुपता और लिप्सा को धीरे-धीरे घटाना चाहिए और उपवास व्रत करने का अभ्यास बनाना चाहिए। यदि आप चाहे कि आपकी समाधि या सल्लेखना अच्छी रीति से हो तो २४ घंटे में एक बार भोजन-पानी करने का अभ्यास बना लें और फिर व्रत-उपवास करते चलें। जैसे-जैसे आपकी अवस्था शिथिल हो आप अपनी साधना को प्रखर बनाने लगें और जब शिथिलता चरम पर पहुँच जाये, तो गुरु चरणों में जा करके उनसे समाधि का निवेदन करें, उनके मार्गदर्शन में समाधि लें और जो कल मैंने सल्लेखना की विधि बताई थी उसके अनुरूप सारा कार्य करें।

Edited by: Pramanik Samooh

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