चक्रवर्ती सम्राट का जैन धर्म में विशेष महत्त्व क्यों?

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शंका

चक्रवर्ती अपने काल में छः खंड जीतने में कितनी हिंसा करता है, कितने राजाओं को अपने अधीनस्थ करता है फिर भी जैनधर्म में उसकी इतनी महत्ता क्यों है?

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समाधान

चक्रवर्ती दिग्विजय करता है तो उसका उद्देश्य समझिए, जो लोग कहते है राजाओं को वश में करने के लिए चक्रवर्ती दिग्विजय करता है, उनकी संपत्ति को हथियाने के लिए चक्रवर्ती दिग्विजय करता है, यह बात मेरे गले नहीं उतरती। क्यों करता है? वह स्वेच्छाचारी राजाओं के कुशासन को कुचलकर संपूर्ण भरत क्षेत्र को एक सूत्र में बांधने के लिए अपनी दिग्विजय यात्रा करता है ताकि धर्म की ठीक ढंग से प्रवृति हो सके और यहाँ की प्रजा खुशहाली  का जीवन जी सके। यह उसका क्षत्रिय धर्म है कि राजा के रहते उसके क्षेत्र में कोई अन्याय ना हो सके। चक्रवर्ती के रहते हुए कहीं अधर्म, अनाचार और पाखंड ना पनप सके। उसे संपत्ति की जरूरत होती तो राजाओं के द्वारा अधीनता स्वीकारने के बाद उनकी सारी संपत्ति हथिया लेना चाहिए था, जबकि चक्रवर्ती उनकी सारी संपत्ति उन्हें ही दे देता है, कुछ प्रसंगों मे तो अलग से भेंट भी देता है। 

तो चक्रवर्ती किसी शत्रु के हनन के लिए नहीं, पूरे भूमंडल को एक सूत्र मे पिरोने के लिए यह कार्य करता है इसलिए इसमें कोई हिंसा जैसी बात प्रतीत नहीं होती।

Edited by: Pramanik Samooh

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